“विजयादशमी: असत्य पर सत्य की विजय का पर्व”

विजयादशमी: असत्य पर सत्य की विजय का पर्व

विजयादशमी
संघ के शताब्दी वर्ष में विजयादशमी के अवसर पर कुछ करणीय कार्य।
2 अक्टूबर, 2025 को संघ 100 वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है।
संघ के शताब्दी वर्ष में प्रवेश करने पर स्वयंसेवकों के लिए कुछ करणीय कार्य तय किए गए हैं। वे हैं –

  1. विजयादशमी का पर्व बस्ती और मंडलश: धूमधाम से मनाना। (22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक)
  2. वृहत् गृह- संपर्क ( 5 नवंबर से 26 नवंबर2025 तक)।
  3. सामाजिक सद्भाव बैठक (खंड एवं नगरश:) 1 – 31 जनवरी 2026।
  4. हिंदू सम्मेलन (मंडल एवं बस्तीश:) 1 फरवरी से 31 मार्च
    2026।
  5. प्रमुख जन गोष्ठी ( अप्रैल एवं मई 2026) और
  6. युवा कार्यक्रम – (15 से 30 वर्ष) 1 जुलाई से 31 अगस्त 2026।

7. अधिकतम स्थान पर शाखा – 25 सितंबर से 10 अक्टूबर (कोई एक सप्ताह)

विजयादशमी उत्सव (2 अक्टूबर 2025)

(22 सितंबर से 2 अक्टूबर तक मनाने की योजना)

  1. बस्ती/ मंडलश: उत्सव मनाने की योजना तैयार करनी है।
  2. पर्याप्त संख्या में वक्ताओं की सूची तैयार करना।
  3. वक्ता प्रशिक्षित हों।
  4. वक्ता स्वयंसेवक ही हों।
  5. सूची में वैसे कार्यकर्ता या वक्ताओं का नाम जो विषय ठीक से रख सकें
  6. सुप्त शक्ति, संचित शक्ति या पुराने कार्यकर्ताओं को भी प्रयत्न पूर्वक सूची में जोड़ना ।
  7. वक्ता या कार्यकर्ता अध्ययन- अध्यापन में अभिरुचि रखने वाला हो ।
  8. कार्यकर्ता अपना समय देने वाला हो।
  9. गतिविधि और विविध संगठनों के अच्छे वक्ताओं का नाम सूची में जोड़ा जा सकता है। (भाजपा को छोड़कर)
  10. बौद्धिक हेतु नियोजन में बस्ती बदलना अच्छा रहेगा।
  11. वक्ताओं की कार्यशाला आयोजित हो तथा उसमें निम्न बातों पर उनका ध्यान आकर्षित किया जाए :-
    — 100 वर्ष के संघ के कल को चार भागों में बाँट कर प्रशिक्षण हो ताकि श्रोता को बात स्पष्ट रूप में समझ में आ जाए।
    1. प्रथम चरण ( 1925- 1950)
  12. बौद्धिक कर्ताओं के बौद्धिक में संघ स्थापना की पृष्ठभूमि और डॉक्टर साहब के जीवन- वृत्त की कुछ घटनाओं की चर्चा हो।
  13. देश की तात्कालिक स्थिति का वर्णन हो।
    यथा – 1857 का युद्ध हारने के बाद भारतीय जन मानस में हताशा की स्थिति थी।
    — समाज आत्मविश्वमृत हो गया था।
  14. डॉक्टर जी जन्मजात देशभक्त और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने जंगल यात्रा की कथा स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु जेल भी गए।
  15. छात्र जीवन में अनुशीलन समिति के सदस्य थे ।
  16. वे कांग्रेस के कार्यकर्ता थे। नागपुर कांग्रेस अधिवेशन की योजना के मुख्य सूत्रधार थे।
  17. राष्ट्रभक्ति भाव का जागरण आवश्यक था तथा हिंदुओं की संगठनात्मक एकता आवश्यक थी।
  18. संघ स्थापना का तात्कालिक लक्ष्य स्वतंत्रता प्राप्ति ही था।
  19. संघ लगातार स्वतंत्रता प्राप्ति में सहयोगी रहा।
  20. 1940 में डॉक्टर साहब का देहावसान हुआ तथा परम पूज्य श्रीगुरु जी सर संघचालक बने।
  21. पूज्य गुरु जी के नेतृत्व में संघ का कार्य विस्तार तेजी से हुआ।
  22. विभाजन की विभीषिका के समय स्वयंसेवकों का योगदान अत्यंत प्रशंसनीय था।
  23. महात्मा गांधी की हत्या का गलत आरोप बढ़कर संघ पर पहला प्रतिबंध लगाया गया जिसे बाद में कोर्ट ने आधारहीन माना।
    1. द्वितीय चरण ( 1951 – 1975तक)
      परम पूज्य गुरु जी का संपूर्ण देश में भ्रमण प्रारंभ हुआ। उनकी सभाओं में लाखों हिंदू श्रोता के रूप में आते थे।
      ★ संघ का देश भर में विस्तार हुआ ।
      ★ 1975 में दूसरा प्रतिबंध लगा।
      1. तृतीय चरण( 1976से 20)
        — राम मंदिर आंदोलन पर चर्चा।
        — पूज्य बाला साहब देवरस जी तृतीय सर संघचालक बने।
        — अस्पृश्यता मिटाने हेतु पूज्य बाला साहब देवरस का
        विशेष ध्यान था।
        इनके जीवन से संबंधित कुछ घटनाओ की चर्चा।
        — राम सेतु से संबंधित चर्चा।
  24. चतुर्थ चरण (2001 से 2025 तक)
    निम्न बिंदुओं पर श्रोताओं का ध्यान आकृष्ट कराया जाए –
  • विश्व क्षितिज पर उभरता भारत,
  • हिंदुत्व का जागरण,
  • सामरिक क्षेत्र में विकास,
  • आर्थिक क्षेत्र में विकास ,
  • सर्जिकल स्ट्राइक ,
  • 35Aतथा 370 की समाप्ति,
  • राम मंदिर का निर्माण हुआ जो हिंदुओं की शादियों की इच्छा थी,
  • सामाजिक समरसता पर चर्चा।

★ भारत की वर्तमान चुनौतियां जैसे—

  • लव जिहाद,
  • लैंड जिहाद
  • गजवा ए हिंद की साजिश ,
  • मतांतरण,
  • जातिवाद ,
  • जातिवाद आधारित राजनीति,
  • ईसाई मिशनरियों के साजिशें।
    ★ बौद्धिक में पांच परिवर्तन की चर्चा भी निश्चित रूप से हो:
  • कुटुंब प्रबोधन
  • सामाजिक समरसता
  • पर्यावरण
  • स्व का बोध और
  • नागरिक कर्तव्य।
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    विजयदशमी पर्व क्यों मनाते हैं इस पर भी प्रकाश डालना है। यथा –
  • धर्म की स्थापना ,
  • आसुरी शक्ति का नाश,
  • अधर्म का नाश,

* सनातन धर्म में शास्त्र के साथ- साथ शस्त्र का भी महत्त्व पूर्ण स्थान है।

चुकी बस्ती और मंडल सह मनाने की योजना है। अतः उसके अनुरूप ध्वज तथा ध्वज दंड की व्यवस्था हो,
मुख्य शिक्षक तैयार हों,
प्रार्थना वाचक और

अमृत वचन लेने वाले तैयार हों।

निम्नलिखित कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण भी होना चाहिए :-
मुख्य शिक्षक का,
प्रार्थना लेने वाले का,
अमृत वाचन करने वाले का,
सामूहिक गीत लेने वाले का तथा

एकल गीत लेने वाले का।

उत्सव स्थान की व्यवस्था :-

  • ध्वज दंड ध्वज तथा संघ स्थान की समुचित व्यवस्था हो।
  • मुख्य अतिथि की योजना। ( आवश्यक नहीं ।)
  • मुख्य अतिथि का उद्बोधन पहले होना चाहिए यदि हों तो ।
  • अपने बौद्धिक कर्ता का बौद्धिक बाद में हो।
  • गणवेशधारी स्वयंसेवकों की संख्या अच्छी हो।
  • संचलन हो परंतु अनिवार्य नहीं।

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